बंगाल चुनाव से पहले ममता बनर्जी की बड़ी बैठक 10 प्रतिज्ञा के साथ सियासी माहौल गरम
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्य की मुख्यमंत्री और Mamata Banerjee रविवार को तृणमूल कांग्रेस की एक अहम बैठक की अध्यक्षता करने जा रही हैं, जिसे चुनावी रणनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब राज्य में चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर है और सभी राजनीतिक दल जनता को साधने में जुटे हुए हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव इस बार दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होने वाले हैं, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। ऐसे में सत्तारूढ़ Trinamool Congress अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में जुटी है। ममता बनर्जी की यह बैठक पार्टी संगठन को मजबूत करने और चुनावी अभियान को धार देने के उद्देश्य से बुलाई गई है।
इससे पहले ममता बनर्जी ने शुक्रवार को पार्टी का चुनावी घोषणापत्र “10 प्रतिज्ञा” जारी किया, जिसमें जनता से कई वादे किए गए हैं। इस घोषणापत्र के जरिए उन्होंने विकास, सामाजिक कल्याण और राज्य की स्थिरता को मुख्य मुद्दा बनाया है। हालांकि, इस घोषणापत्र को लेकर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे अव्यावहारिक करार दिया है।
घोषणापत्र जारी करते समय ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और खासकर प्रधानमंत्री Narendra Modi तथा भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में अशांति फैलाने और दंगे भड़काने की साजिश रची जा रही है। उनका दावा है कि सीमावर्ती इलाकों से धन और हथियार लाकर राज्य में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की जा रही है, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रपति शासन लागू करने की स्थिति बनाई जा सके।
ममता बनर्जी ने जनता से अपील करते हुए कहा कि वे एकजुट रहें और किसी भी प्रकार के प्रलोभन या डर के आगे न झुकें। उन्होंने कहा कि बंगाल की शांति और लोकतंत्र की रक्षा करना अब जनता की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में जो हालात बन रहे हैं, वे एक तरह के “अघोषित राष्ट्रपति शासन” जैसे प्रतीत होते हैं, जहां लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को प्रभावित किया जा रहा है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच चुनावी मुकाबला भी दिलचस्प होता जा रहा है। ममता बनर्जी इस बार भी Bhabanipur सीट से चुनाव लड़ने जा रही हैं। यहां उनका मुकाबला एक बार फिर भाजपा नेता और नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari से होगा। यह मुकाबला इसलिए भी खास है क्योंकि 2021 के विधानसभा चुनाव में दोनों नेताओं के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली थी।
सुवेंदु अधिकारी ने 2021 में Nandigram सीट से ममता बनर्जी को बेहद कम अंतर से हराया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने भवानिपुर से उपचुनाव लड़कर विधानसभा में वापसी की थी। इस बार फिर दोनों नेताओं के आमने-सामने होने से चुनाव और भी रोमांचक होने की संभावना है।
यदि 2021 के चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो राज्य की 294 सीटों में से तृणमूल कांग्रेस ने 215 सीटें जीतकर लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल की थी, जबकि भाजपा को 77 सीटों पर जीत मिली थी। अन्य दलों का प्रदर्शन सीमित रहा था। तब से लेकर अब तक राज्य की राजनीति में कई उतार-चढ़ाव आए हैं और इस बार का चुनाव नए समीकरणों के साथ लड़ा जा रहा है।
ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस 2011 से लगातार सत्ता में बनी हुई है। ऐसे में पार्टी के सामने सत्ता बरकरार रखने की चुनौती है, जबकि विपक्ष उसे कड़ी टक्कर देने की तैयारी में है। चुनाव से पहले की यह बैठक और घोषणा पत्र राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ममता बनर्जी की रणनीति और “10 प्रतिज्ञा” का जनता पर कितना असर पड़ता है और क्या तृणमूल कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में वापसी कर पाती है या नहीं। फिलहाल बंगाल की राजनीति में बयानबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और चुनावी तैयारियों का दौर तेज हो चुका है, जिससे आगामी चुनाव बेहद अहम और दिलचस्प बन गए हैं।
