वंदे मातरम की अनिवार्यता पर सियासत, भाजपा ने किया फैसले का स्वागत
कांग्रेस ने कहा असली मुद्दे से ध्यान भटकाने की राजनीति कर रही भाजपा
भोपाल। प्रदेश में ’वंदे मातरम’ के गायन की अनिवार्यता को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के पूर्ण संस्करण को अनिवार्य किए जाने के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई हैं। जहां भाजपा इसे राष्ट्रभक्ति का मंत्र बताते हुए कांग्रेस पर तुष्टीकरण का आरोप लगा रही है, वहीं कांग्रेस इसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाने वाली राजनीति करार दे रही है।
भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस फैसले का स्वागत करते हुए कांग्रेस पर तीखे प्रहार किए। शर्मा ने कहा कि आजादी के समय ही वंदे मातरम अनिवार्य हो जाना चाहिए था, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व ने जिन्ना और मुस्लिम लीग को खुश करने के लिए इसके अंश काट दिए और इसकी अनिवार्यता खत्म कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा तुष्टीकरण की राजनीति की है और राष्ट्रगीत के साथ अन्याय किया है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा जारी नए नियमों के अनुसार अब सरकारी आयोजनों में वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य होगा। निर्देश में कहा है कि अब 6 अंतरों वाला पूरा राष्ट्रगीत गाया जाएगा, इसकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित की गई है। जन गण मन (राष्ट्रगान) से पहले वंदे मातरम का गायन होगा। राष्ट्रपति और राज्यपाल के कार्यक्रमों सहित तिरंगा फहराने के दौरान यह अनिवार्य होगा। गीत के दौरान सभी को सम्मान में खड़ा होना अनिवार्य होगा।
आजादी की लड़ाई न लड़ने वाले न सिखाएं महत्व
पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिन्होंने आजादी के आंदोलन में हिस्सा ही नहीं लिया, वे आज हमें वंदे मातरम का महत्व समझा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम हमेशा से हमारे कार्यक्रमों का हिस्सा रहा है और यह हमें स्वाधीनता संग्राम की याद दिलाता है। उन्होंने भाजपा पर केवल दिखावे और मदरसों के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया।
राष्ट्रगीत के सम्मान से कभी नहीं रहा ऐतराज
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि हमें राष्ट्रगीत के सम्मान से कभी ऐतराज नहीं रहा, लेकिन इसके कुछ शब्दों से धार्मिक आपत्ति थी। उन्होंने कहा कि केंद्र ने कौन सा नया पैरा जोड़ा है या हटाया है, उसे देखना होगा। मसूद ने स्पष्ट किया कि खड़े होकर सम्मान देने में उन्हें दिक्कत नहीं है, लेकिन गाना या न गाना अलग विषय है।
