ट्रेजरी नियमों में बदलाव, अब बिना अनुमति नहीं खुलेंगे सरकारी बैंक खाते
मंत्रियों के लिए प्रक्रिया हुई आसान
भोपाल। प्रदेश सरकार ने वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश कोषालय नियमों में पांच साल बाद बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब कोई भी सरकारी विभाग वित्त विभाग की पूर्व अनुमति के बिना नया बैंक खाता नहीं खोल सकेगा। शासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कहीं भी अनाधिकृत खाता संचालित पाया गया, तो इसके लिए संबंधित आहरण संवितरण अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
प्रशासनिक कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए अब डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरों को हस्तलिखित हस्ताक्षरों के समान कानूनी मान्यता दे दी गई है। नई व्यवस्था के तहत कोषालय की समस्त प्राप्तियों और जमाओं को अब अनिवार्य रूप से साइबर ट्रेजरी से जोड़ दिया गया है। पिछले 5 वर्षों से बंद पड़े या निष्क्रिय पीडी खातों की समीक्षा की जाएगी और उन्हें तत्काल बंद किया जाएगा। भुगतान के लिए ई-चेक जैसी पेपरलेस व्यवस्था को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे मैन्युअल गलतियां कम होंगी और ऑडिट प्रक्रिया आसान होगी। अब पेंशनर्स को राहत देते हुए पेंशन और ग्रेच्युटी का भुगतान ई-हस्ताक्षर के माध्यम से किया जा सकेगा।
मंत्रियों को मिली सिंगल सिग्नेचर’ की सुविधा
इन नियमों में प्रदेश के मंत्रियों को विशेष राहत दी गई है। चूंकि मंत्रियों की एम्पलाई आईडी नहीं होती है, इसलिए उनके भुगतान की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। पहले मंत्रियों को अपने वेतन, यात्रा भत्ते और क्षेत्र भत्ते के भुगतान के लिए तीन अलग-अलग स्थानों पर हस्ताक्षर करने पड़ते थे। अब नई व्यवस्था में उन्हें केवल एक बार हस्ताक्षर करने होंगे और तीनों प्रकार के भुगतान प्रोसेस हो जाएंगे।
