बंगाल में 8100 माइक्रो ऑब्जर्वर पर सियासी घमासान, ममता बनर्जी और चुनाव आयोग आमने-सामने
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) को लेकर राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा बंगाल में 8100 माइक्रो ऑब्जर्वर तैनात किए जाने के फैसले ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और चुनाव आयोग के बीच टकराव को तेज कर दिया है। ममता बनर्जी ने इस कदम को राज्य को निशाना बनाने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
बताया जा रहा है कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू की है। इस प्रक्रिया के तहत आयोग ने बंगाल में बड़ी संख्या में माइक्रो ऑब्जर्वर तैनात किए हैं। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची की पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। हालांकि आयोग ने अब तक सार्वजनिक रूप से माइक्रो ऑब्जर्वर की विस्तृत भूमिका और जिम्मेदारियों को स्पष्ट नहीं किया है, जिससे विवाद और गहरा गया है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग बंगाल को जानबूझकर निशाना बना रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह प्रक्रिया देश के अन्य आठ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में भी चल रही है, तो केवल बंगाल में ही इतनी बड़ी संख्या में माइक्रो ऑब्जर्वर क्यों नियुक्त किए गए। उन्होंने इसे राज्य की जनता पर प्रशासनिक दबाव बनाने की कोशिश बताया।
ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखते हुए कहा कि यह कदम राज्य की लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि माइक्रो ऑब्जर्वर की नियुक्ति के जरिए मतदाता आंकड़ों में हेरफेर करने और पुनरीक्षण प्रक्रिया को प्रभावित करने की आशंका है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग की यह कार्रवाई लोगों के अधिकारों को कमजोर कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी ने तीन जजों की बेंच के सामने अपना पक्ष रखा, जिसकी अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत कर रहे थे। उन्होंने अदालत से चुनाव आयोग के इस फैसले की जांच कराने और प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। ममता बनर्जी का कहना है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण जैसे संवेदनशील कार्य में राजनीतिक निष्पक्षता और जनता के विश्वास को बनाए रखना बेहद जरूरी है।
वहीं चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि माइक्रो ऑब्जर्वर की नियुक्ति पूरी तरह प्रशासनिक और तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखकर की गई है। आयोग का मानना है कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों को रोकने और प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के लिए अतिरिक्त निगरानी जरूरी थी। आयोग के अनुसार माइक्रो ऑब्जर्वर स्थानीय स्तर पर सत्यापन प्रक्रिया को मजबूत बनाने का काम करेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में आगामी चुनावी परिस्थितियों को देखते हुए मतदाता सूची का मुद्दा बेहद संवेदनशील हो गया है। विपक्ष और सत्तारूढ़ दल दोनों ही मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में माइक्रो ऑब्जर्वर की तैनाती को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग को सभी राज्यों में एक समान प्रक्रिया अपनानी चाहिए। पार्टी नेताओं का आरोप है कि बंगाल में अलग व्यवस्था लागू करना राजनीतिक रूप से प्रेरित कदम हो सकता है। वहीं विपक्षी दल चुनाव आयोग के कदम का समर्थन करते हुए इसे निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में जरूरी कदम बता रहे हैं।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब देश के कई राज्यों में चुनावी तैयारियां तेज हो रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मतदाता सूची की सटीकता चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता का आधार होती है। इसलिए इस प्रक्रिया में किसी भी तरह के विवाद का असर चुनावी माहौल पर पड़ सकता है।
फिलहाल इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और चुनाव आयोग की अगली प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। बंगाल की राजनीति में पहले से मौजूद तनाव के बीच माइक्रो ऑब्जर्वर का मामला नया सियासी केंद्र बनता नजर आ रहा है।
