प्रदेश को बंधुआ व बाल श्रम मुक्त बनाना सरकार का लक्ष्य
भोपाल। श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा है कि केंद्र सरकार की चार नवीन श्रम संहिताओं में श्रमिकों के स्वास्थ्य, दुर्घटना बीमा और व्यावसायिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बंधुआ मजदूरी और बाल श्रम जैसी कुप्रथाओं के जड़ से उन्मूलन के लिए राज्य में एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाएगा।
कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर, भोपाल में आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए श्रम मंत्री ने बताया कि इस रोडमैप के पाँच प्रमुख स्तंभ होंगे। कानूनी सहायता, पुनर्वास, कौशल विकास, जनजागरूकता और प्रशासनिक संवेदनशीलता। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार का लक्ष्य मध्यप्रदेश को बंधुआ मजदूरी और बाल श्रम से पूरी तरह मुक्त बनाना है। पटेल ने कहा कि बंधुआ मजदूर की सटीक परिभाषा तय करना भले ही आसान न हो, लेकिन यह निश्चित किया जा सकता है कि किन परिस्थितियों में कोई व्यक्ति बंधुआ श्रम की ओर धकेला जाता है। प्रवासी मजदूरी, अशिक्षा, कानून की जानकारी का अभाव, नशे की लत, मानसिक कमजोरी, बाल श्रम और परंपरागत व्यवसायों से जुड़ी तात्कालिक आवश्यकताएं बंधुआ श्रम के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने बताया कि बारूद से जुड़े कारखानों को मध्यप्रदेश में अत्यंत खतरनाक श्रेणी में रखा गया है। श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उद्योगों का वर्गीकरण खतरनाक और अति-खतरनाक श्रेणियों में किया जाना आवश्यक है।
मजदूरी के कारण कोई बंधुआ ना बन जाए
श्रम मंत्री ने कहा कि आज संकल्प लेने का दिन है, ताकि आने वाले समय में यह कहा जा सके कि मध्यप्रदेश में न कोई बाल मजदूर है और न ही कोई बंधुआ मजदूर। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हुनर को रोका नहीं जा सकता, लेकिन यह सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है कि किसी को मजदूरी के कारण बंधुआ न बनाया जाए और किसी बच्चे से उसका बचपन न छीना जाए।
