चालीस साल बाद भी पीछा नहीं छोड़ रही गैस त्रासदी
ज़हरीली गैस का साया अब भी बरकरार, पीड़ितों में कैंसर का खतरा 13 गुना अधिक
भोपाल। वक्त के साथ जख्म भर जाते हैं, लेकिन भोपाल की हवाओं में घुला यूनियन कार्बाइड का जहर चार दशकों बाद भी रिस रहा है। विश्व कैंसर दिवस के मौके पर सामने आए संभावना ट्रस्ट के ताजा आंकड़े रोंगटे खड़े करने वाले हैं, जो यह बताते हैं कि गैस का वह काला धुआं आज कैंसर के रूप में पीड़ितों की रगों में दौड़ रहा है।
दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक त्रासदी को बीते 40 साल हो चुके हैं, लेकिन इसके पीड़ितों के लिए कैलेंडर की तारीखें बदली हैं, उनकी नियति नहीं। आज भी यह त्रासदी बीमारियां बनकर पीड़ितों का पीछा कर रही है। विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर आज संभावना ट्रस्ट क्लीनिक द्वारा जारी स्वास्थ्य आंकड़ों के अनुसार, गैस प्रभावित इलाकों में कैंसर का खतरा किसी सामान्य क्षेत्र की तुलना में 13 गुना अधिक पाया गया है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि मिथाइल आइसोसाइनेट के संपर्क में आए लोगों में न केवल कैंसर, बल्कि किडनी फेलियर और फेफड़ों के गंभीर संक्रमण की दर भी सामान्य आबादी से कहीं ज्यादा है। रिपोर्ट के अनुसार पुरुषों में जोखिम सामान्य से 14.92 गुना अधिक पाया गया है। वहीं ’महिलाओं में जोखिम सामान्य से 12.22 गुना अधिक। चौंकाने वाली बात यह है कि पीड़ितों में गले के कैंसर की दर 33.86 गुना तक ज्यादा दर्ज की गई है। सर्वे टीम के सदस्य राधे लाल नापित ने बताया कि विशेष रूप से खून, फेफड़े और गले के कैंसर के डराने वाले मामले सामने आए हैं। इनमें खून का कैंसर सामान्य से 21.6 गुना अधिक, फेफड़े का कैंसर का सामान्य से 28.78 गुना अधिक और गले का कैंसरः सामान्य से 33.86 गुना अधिक होना पाया गया है।
सत्यापन के बाद तैयार किया सर्वेक्षण
ट्रस्ट की ओर से राधेलाल नापित और फरहत जहां ने बताया कि यह सर्वेक्षण केवल अनुमान नहीं है, बल्कि 1992 से 2012 के बीच 21,276 गैस पीड़ितों के मेडिकल रिकॉर्ड और जांच पर्चों के कड़े सत्यापन के बाद तैयार किया गया है। जयप्रकाश नगर और काज़ी कैंप जैसी बस्तियों में रहने वाले लोग आज भी उस एक रात की कीमत अपनी जान देकर चुका रहे हैं।
सर्वे में प्रभावित इलाके
संभावना क्लीनिक की फरहत जहां ने जानकारी दी कि सर्वे के लिए आंकड़े गैस पीड़ित क्षेत्र से 3 किमी की दूरी पर स्थित जयप्रकाश नगर, कैंची छोला, काज़ी कैंप से जुटाए गए हैं। वहीं अपीड़ित क्षेत्र से 8 किमी से दूर पर अन्ना नगर, भीम नगर और वल्लभ नगर से जटाए गए हैं। रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास की बस्तियों में न केवल कैंसर, बल्कि किडनी फेलियर और फेफड़ों के संक्रमण के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं, जो आने वाले समय के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है।
