जिलों में छोटी होगी कार्यकारिणी, बढ़ेगी जिम्मेदारी
दिल्ली के निर्देश, बड़ी कार्यकारिणियों से परहेज
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में संगठन विस्तार को लेकर चल रही मनमानी पर दिल्ली ने रोक लगा दी है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल द्वारा जारी ताजा निर्देशों ने प्रदेश कांग्रेस के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। अब जिलों में नेताओं को खुश करने के लिए बनाई जाने वाली भारी-भरकम (जम्बो) कार्यकारिणी बीते दिनों की बात हो जाएगी।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह कड़ा निर्णय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया गया है। नए नियमों के मुताबिक बड़े जिले की कार्यकारिणी में अधिकतम 55 सदस्य होंगे। वहीं छोटे जिलों में अधिकतम 35 सदस्य होंगे। सभी जिला अध्यक्षों को 15 दिन के भीतर इस गाइडलाइन के तहत नई कार्यकारिणी गठित करने के आदेश दिए गए हैं। पार्टी की इस नई गाइड लाइन से जिन जिलों में कार्यकारिणी बन गई है, वहां संतुलन बिगड़ता नजर आ रहा है।
इन जिलों में बिगड़ा समीकरण
मध्य प्रदेश में गुटबाजी को संतुलित करने के लिए जम्बो कार्यकारिणी की पुरानी परंपरा रही है। हाल ही में 30 जनवरी को जारी सूचियों ने केंद्रीय नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति गाइडलाइन के विपरीत है। खासकर छिंदवाड़ा जिले में वर्तमान 240 सदस्य है, नई गाइडलाइन के हिसाब से 55 सदस्य होने चाहिएं। इसी तरह सागर जिले में 150 से ज्यादा पदाधिकारी हैं। यहां पर भी 55 सदस्य होने चाहिए। भोपाल शहर 106 नाम है, जबकि नई गाइड लाइन के हिसाब से 55 सदस्य होने चाहिए। भोपाल ग्रामीण 85 सदस्य है, जबकि होने चाहिए 55 सदस्य और मऊगंज (छोटा जिला) है यहां पर 40 सदस्य हैं, जबकि 35 सदस्य होने चाहिए।
बढ़ सकती है रार
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन जिलों की कार्यकारिणी घोषित हो चुकी है, क्या उनमें कटौती की जाएगी? छिंदवाड़ा और सागर जैसे जिलों में तय सीमा से चार गुना ज्यादा नेता पद संभाल चुके हैं। यदि दिल्ली के आदेश का अक्षरशः पालन हुआ, तो प्रदेश नेतृत्व को अपनों की ही नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। फिलहाल, इस ’फरमान’ ने उन कार्यकर्ताओं की बेचैनी बढ़ा दी है जो हाल ही में पदाधिकारी बने हैं।
