संसदीय समिति की सिफारिशों को यूजीसी ने किया दरकिनार : दिग्विजय
फर्जी शिकायत पर सजा हटाने का फैसला यूजीसी का निजी, समिति ने नहीं दी थी ऐसी कोई सलाह
भोपाल। यूजीसी के नए इक्विटी रेगुलेशंस 2026 को लेकर देशव्यापी विरोध के बीच कांग्रेस नेता और संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विवादित संशोधनों के लिए संसदीय समिति जिम्मेदार नहीं है, बल्कि यूजीसी ने अपनी मर्जी से महत्वपूर्ण प्रावधानों को बदला और कुछ को नजरअंदाज किया है।
सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए दिग्विजय सिंह ने खुलासा किया कि यूजीसी ने समिति के दो सबसे महत्वपूर्ण सुझावों को स्वीकार ही नहीं किया। समिति ने सिफारिश की थी कि इक्विटी कमेटियों में एससी, एसटी और ओबीसी की 50 प्रतिशत से अधिक भागीदारी सुनिश्चित हो। भेदभाव के ठोस और विस्तृत उदाहरणों को नियमों में शामिल करने का सुझाव दिया गया था, जिसे यूजीसी ने अनदेखा कर दिया। संसदीय समिति ने फर्जी शिकायत पर सजा वाले प्रावधान को हटाने या सामान्य वर्ग के छात्रों को नियमों से बाहर रखने की सिफारिश कभी नहीं की। यह भ्रम फैलाया जा रहा है, ये फैसले यूजीसी ने स्वयं लिए हैं।
इसलिए भड़का है छात्रों का गुस्सा
विवाद की मुख्य जड़ नए नियमों से फर्जी शिकायत पर दंड का प्रावधान हटाना है। छात्र संगठनों का तर्क है कि स्पष्ट परिभाषा न होने और दंड का डर खत्म होने से गलत आरोपों का खतरा बढ़ेगा। रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रावधान समिति की मूल सिफारिशों में शामिल था, जिसे अंतिम रेगुलेशन तैयार करते समय यूजीसी ने हटा दिया।
