सरकार नहीं समाज सेवक हैं की भावना के काम करें अधिकारी-कर्मचारी
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मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक सेवा, वन सेवा के अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को किया संबोधित
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि शासकीय अधिकारी-कर्मचारी इस भावना से कार्य करें कि वे सरकार के नहीं समाज के सेवक हैं। उनकी कार्यशैली में मानवीयता व संवेदना का सदैव प्रकटीकरण होना चाहिए। शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों को प्राप्त अधिकार जन-आकांक्षाओं और जनहित की पूर्ति के लिए हैं और उनकी जनता के प्रति जबावदारी है। शासकीय सेवा बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का अवसर प्रदान करती है साथ ही यह परीक्षा भी लेती है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रशासन अकादमी भोपाल में भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय वन सेवा, राज्य सेवा अधिकारियों के संयुक्त आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को नई दिल्ली से ऑनलाइन संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि सामान्यतः व्यक्ति जब अधिकार संपन्न होता है तो उसमें ठहराव और स्थिरता का भाव आ जाता है, जबकि हमें निरंतर सचेत और सक्रिय रहना है। शासकीय सेवा केवल नौकरी नहीं अपितु समाज के लिए सर्वश्रेष्ठ करने की बड़ी जिम्मेदारी है। हमें जो भी भूमिका मिल रही है उसे हम पूर्ण आत्मविश्वास के साथ बेहतर से बेहतर तरीके से निभाने का प्रयत्न करें।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों से सुशासन के लिए कार्य करने की अपेक्षा है। उन्होंने सुशासन की व्याख्याता करते हुए कहा कि लोकहित में किया गया कार्य ही सुशासन है। भगवान श्री राम का रामराज्य तथा सम्राट विक्रमादित्य व सम्राट अशोक का कार्यकाल प्रशासनिक दक्षता और सुशासन का पर्याय माना जाते हैं। उन्होंने से कहा कि वे समय का सदुपयोग सर्वश्रेष्ठ रूप में करें और अपनी क्षमता व योग्यता के दम पर निरंतर आगे बढ़ने का प्रयास करें।
कर्मयोगी की तरह कार्य कर अपनी पहचान बनाएं
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रशिक्षुओं को निर्भिक और निस्वार्थ रहते हुए कर्मयोगी की तरह काम करते हुए अपनी पहचान बनाने और कार्यशैली में पारदर्शिता, ईमानदारी व कर्तव्यनिष्ठा के बल पर अपनी आभा समाज में बिखेरने तथा नई विधाओें, नवाचारों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए सभी के उज्जवल भविष्य की कामना की।
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि शासकीय अधिकारी-कर्मचारी इस भावना से कार्य करें कि वे सरकार के नहीं समाज के सेवक हैं। उनकी कार्यशैली में मानवीयता व संवेदना का सदैव प्रकटीकरण होना चाहिए। शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों को प्राप्त अधिकार जन-आकांक्षाओं और जनहित की पूर्ति के लिए हैं और उनकी जनता के प्रति जबावदारी है। शासकीय सेवा बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का अवसर प्रदान करती है साथ ही यह परीक्षा भी लेती है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रशासन अकादमी भोपाल में भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय वन सेवा, राज्य सेवा अधिकारियों के संयुक्त आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को नई दिल्ली से ऑनलाइन संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि सामान्यतः व्यक्ति जब अधिकार संपन्न होता है तो उसमें ठहराव और स्थिरता का भाव आ जाता है, जबकि हमें निरंतर सचेत और सक्रिय रहना है। शासकीय सेवा केवल नौकरी नहीं अपितु समाज के लिए सर्वश्रेष्ठ करने की बड़ी जिम्मेदारी है। हमें जो भी भूमिका मिल रही है उसे हम पूर्ण आत्मविश्वास के साथ बेहतर से बेहतर तरीके से निभाने का प्रयत्न करें।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों से सुशासन के लिए कार्य करने की अपेक्षा है। उन्होंने सुशासन की व्याख्याता करते हुए कहा कि लोकहित में किया गया कार्य ही सुशासन है। भगवान श्री राम का रामराज्य तथा सम्राट विक्रमादित्य व सम्राट अशोक का कार्यकाल प्रशासनिक दक्षता और सुशासन का पर्याय माना जाते हैं। उन्होंने से कहा कि वे समय का सदुपयोग सर्वश्रेष्ठ रूप में करें और अपनी क्षमता व योग्यता के दम पर निरंतर आगे बढ़ने का प्रयास करें।
कर्मयोगी की तरह कार्य कर अपनी पहचान बनाएं
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रशिक्षुओं को निर्भिक और निस्वार्थ रहते हुए कर्मयोगी की तरह काम करते हुए अपनी पहचान बनाने और कार्यशैली में पारदर्शिता, ईमानदारी व कर्तव्यनिष्ठा के बल पर अपनी आभा समाज में बिखेरने तथा नई विधाओें, नवाचारों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए सभी के उज्जवल भविष्य की कामना की।